लखनऊ: यूपी की राजधानी लखनऊ में बैठा लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) इन दिनों ग्लोबल हो गया है! सुनने में थोड़ा फिल्मी लगेगा, लेकिन बात सोलह आने सच है. देश के कोने-कोने से तो छात्र यहां पढ़ने आते ही थे, अब समंदर पार से भी विदेशी छात्रों की फौज लखनऊ विश्वविद्यालय का रुख कर रही है. आलम ये है कि आने वाले शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यूनिवर्सिटी को 77 अलग-अलग देशों से 3,421 आवेदन मिले हैं. ये आंकड़ा सिर्फ नंबर नहीं है, बल्कि पिछले साल के मुकाबले पूरे 64 प्रतिशत की रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी है, जो सीधे-सीधे बताती है कि लखनऊ विश्वविद्यालय की चमक अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैल रही है.
आप सोच रहे होंगे कि इतनी बड़ी संख्या क्यों है? तो भई, पिछले सत्र 2025-26 की बात करें तो विश्वविद्यालय को 76 देशों से 2,083 एप्लीकेशन मिले थे. इस बार तो भैया, सीधे-सीधे 1,338 आवेदन ज्यादा आए हैं, और कुल आंकड़ा 3,421 तक पहुंच गया है.
ये अपने आप में एक मिसाल है कि कैसे एक भारतीय विश्वविद्यालय दुनिया के नक्शे पर अपनी जगह बना रहा है.
इस शानदार सफलता का पूरा क्रेडिट जाता है लखनऊ विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. जय प्रकाश सैनी को.
उन्होंने बताया कि ये सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की वैश्विक प्रतिष्ठा का नतीजा है. साथ ही, नई शिक्षा नीति (NEP) के हिसाब से तैयार किए गए मल्टी-डिसिप्लिनरी यानी बहुविषयक कोर्स भी विदेशी छात्रों को खूब लुभा रहे हैं.
यूनिवर्सिटी के आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा, यानी 2,552 एप्लीकेशन तो सिर्फ अंडरग्रेजुएट (UG) कोर्स के लिए आए हैं. वहीं, पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्स के लिए 595 और रिसर्च यानी पीएचडी कार्यक्रमों के लिए 274 आवेदन प्राप्त हुए हैं.
ये दिखाता है कि छात्र सिर्फ डिग्री के लिए नहीं, बल्कि रिसर्च और उच्च शिक्षा के लिए भी लखनऊ विश्वविद्यालय को तरजीह दे रहे हैं.
कहां-कहां से आए हैं ये 'अंतरराष्ट्रीय मेहमान'?
यूनिवर्सिटी के कुलपति ने बताया कि इस बार सबसे ज्यादा आवेदन हमारे पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश और नेपाल से तो आए ही हैं, लेकिन अफ्रीकी देशों नाइजीरिया, सूडान और तंजानिया के छात्रों ने भी खूब दिलचस्पी दिखाई है. ये सिर्फ एशियाई या अफ्रीकी देश ही नहीं हैं, बल्कि जर्मनी और पोलैंड जैसे यूरोपीय देशों से भी छात्रों ने लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए आवेदन किया है.
ये दिखाता है कि विश्वविद्यालय की पहुंच कितनी दूर तक है. यूनिवर्सिटी का इंटरनेशनल सेल (अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ) अब इन सभी आवेदनों के दस्तावेज़ों की जांच, छात्रों की एलिजिबिलिटी यानी पात्रता का वेरिफिकेशन और वीजा से जुड़े सभी काम निपटाने में लगा हुआ है.
6 साल में 5 गुना बढ़ी संख्या, ये हैं आंकड़े
विदेशी छात्रों के आवेदन में ये बढ़ोतरी कोई एक दिन का खेल नहीं है, बल्कि पिछले छह सालों से ये लगातार बढ़ रही है. अगर आंकड़ों पर गौर करें तो आपको खुद ही पता चल जाएगा कि लखनऊ विश्वविद्यालय ने कितनी तरक्की की है:
- साल 2021-22 में: 637 आवेदन
- साल 2022-23 में: 814 आवेदन
- साल 2023-24 में: 1,365 आवेदन
- साल 2024-25 में: 1,769 आवेदन
- साल 2025-26 में: 2,083 आवेदन
- और अब, 2026-27 के लिए: 3,421 आवेदन
आप देख सकते हैं कि छह सालों में ये आंकड़ा लगभग पांच गुना बढ़ गया है, जो विश्वविद्यालय की बढ़ती लोकप्रियता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी पहचान का सीधा सबूत है.
आखिरी मौका! आवेदन की तारीख फिर बढ़ाई गई
तो भैया, अगर आप भी लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिले का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख एक बार फिर बढ़ा दी है.
ये फैसला इसलिए लिया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र आवेदन कर सकें, खासकर वो जिन्हें दस्तावेज़ या अन्य औपचारिकताओं में थोड़ी देर हो गई हो.
प्रवेश समन्वयक प्रो. अनित्य गौरव ने बताया कि पीएचडी (फुलटाइम और पार्टटाइम दोनों) कोर्स में ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि जो पहले 30 जून थी, अब उसे बढ़ाकर 15 जुलाई कर दिया गया है.
इसी तरह, यूजी प्रोफेशनल कोर्स, जैसे बीबीए एलएलबी (5 साल का इंटीग्रेटेड कोर्स), बीफार्म और बीफार्म लेटरल एंट्री में प्रवेश के लिए आवेदन की आखिरी तारीख भी अब 15 जुलाई तक कर दी गई है.
इसके अलावा, जो केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया के तहत आने वाले पीजी और पीजी प्रोफेशनल कोर्स हैं, उनके लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून से बढ़ाकर 5 जुलाई कर दी गई है. तो देर किस बात की, अगर आप भी इस बढ़ती हुई यूनिवर्सिटी का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो फटाफट आवेदन कर दें, क्योंकि तारीखें अब ज्यादा नहीं बढ़ेंगी, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है.

